"आज स्क्रैप का रेट क्या है?" – वाराणसी का हर प्लांट मैनेजर, स्टोर इंचार्ज और ठेकेदार बेचने से पहले यही पूछता है। और इसी सवाल के ऑनलाइन सबसे ज़्यादा गलत जवाब मिलते हैं। कई वेबसाइटों की रेट लिस्ट महीनों पुरानी होती है, ग्रेड का फ़र्क नहीं बताती, और घरेलू कबाड़ के भाव को इंडस्ट्रियल लॉट के भाव से मिला देती है। यह गाइड बताती है कि वाराणसी और पूर्वांचल में इंडस्ट्रियल स्क्रैप का रेट असल में कैसे तय होता है, आम मेटल के अनुमानित भाव क्या हैं, और कैसे पक्का करें कि जो रेट बताया गया, वही भुगतान हो।
वाराणसी में इंडस्ट्रियल स्क्रैप के अनुमानित रेट (अक्टूबर 2026)
नीचे दी गई टेबल रामनगर, चाँदपुर, लहरतारा, चंदौली और आसपास के पूर्वांचल इलाकों के इंडस्ट्रियल लॉट (500 किलो और अधिक) के अनुमानित दायरे दिखाती है। ये लाइव भाव नहीं हैं। मेटल बाज़ार रोज़ बदलता है, इसलिए इन्हें योजना के लिए इस्तेमाल करें और बेचने से पहले उस दिन का रेट ज़रूर पूछें।
| मटेरियल | आम इंडस्ट्रियल रूप | अनुमानित रेट (₹/किलो) |
|---|---|---|
| MS / HMS लोहा | स्ट्रक्चरल स्टील, एंगल, चैनल, शीट कटिंग | 28 – 34 |
| कास्ट आयरन (CI) | मशीन बॉडी, पुली, कास्टिंग | 24 – 29 |
| स्टेनलेस स्टील | SS 304 / 316 शीट, पाइप, टैंक | 85 – 140 |
| एल्युमिनियम | सेक्शन, कास्ट, शीट, बर्तन-ग्रेड | 140 – 190 |
| पीतल (ब्रास) | फिटिंग, वाल्व, हनी-ग्रेड टर्निंग | 380 – 430 |
| तांबा (कॉपर) | ब्राइट वायर (Barley), नंबर 1 (Berry/Candy), आर्मेचर | 580 – 660 |
| इंसुलेटेड केबल | तांबा या एल्युमिनियम पावर केबल | मेटल रिकवरी % के आधार पर |
| मशीनरी / प्लांट | किसी भी हालत में | साइट देखकर रेट |
दो अलग लॉट जिन्हें "तांबा स्क्रैप" कहा जाता है, उनके भाव में ₹80 प्रति किलो से भी ज़्यादा का अंतर हो सकता है – यह इस पर निर्भर है कि तांबा साफ़ और चमकदार है, जला हुआ है, टिन चढ़ा है या लोहे से जुड़ा है। इसलिए किसी रेट लिस्ट का एक नंबर शायद ही कभी गंभीर खरीदार के असली भाव से मेल खाता है।
वाराणसी का स्क्रैप रेट दिल्ली या मुंबई से अलग क्यों होता है
स्क्रैप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी है, लेकिन आपको मिलने वाला भाव हमेशा स्थानीय होता है। पूर्वांचल में तीन बातें सबसे ज़्यादा असर डालती हैं।
1. पिघलाने वाली मिल से दूरी
वाराणसी का फेरस स्क्रैप आम तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उससे आगे की इंडक्शन फर्नेस और रोलिंग मिलों में जाता है। मिल तक का भाड़ा सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से आपके रेट से घटता है। रामनगर और नेशनल हाईवे के पास की यूनिटों को आम तौर पर दूर की साइटों से थोड़ा बेहतर नेट रेट मिलता है, क्योंकि ट्रक जल्दी लोड होकर निकल जाते हैं।
2. पूर्वांचल उद्योग की स्थानीय माँग
जब इलाके की फाउंड्री और मिलें पूरी क्षमता पर चलती हैं, तब MS और कास्ट आयरन स्क्रैप की माँग बढ़ती है और खरीदार ज़्यादा प्रतिस्पर्धा करते हैं। निर्माण का धीमा मौसम, ख़ासकर बरसात, लंबे स्टील की माँग घटाता है और फेरस स्क्रैप के भाव नरम पड़ते हैं।
3. लॉट का आकार और नियमितता
एक बार का 2 टन का लॉट, हर महीने के 20 टन वाले कॉन्ट्रैक्ट से अलग रेट पर बिकता है। नियमित लॉट के लिए खरीदार ट्रक, मज़दूर और बिक्री पहले से प्लान कर सकता है, इसलिए कम मार्जिन पर रेट दे सकता है। अगर आपकी यूनिट हर महीने स्क्रैप निकालती है, तो बेंचमार्क से जुड़ा रेट कॉन्ट्रैक्ट अक्सर हर लॉट अलग बेचने से बेहतर रहता है।
रोज़ स्क्रैप का भाव किन बातों से बदलता है
नॉन-फेरस मेटल (तांबा, पीतल, एल्युमिनियम): भारतीय खरीदार इनका भाव लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) और घरेलू MCX वायदा बाज़ार से तय करते हैं, जिसमें रुपया-डॉलर विनिमय दर भी जुड़ती है। रुपया कमज़ोर होने पर आयातित मेटल महँगा होता है और घरेलू स्क्रैप भाव आम तौर पर बढ़ जाते हैं, भले LME स्थिर हो।
फेरस स्क्रैप (MS, HMS, CI): भाव देश के तैयार स्टील, बिलेट और स्पंज आयरन के दाम पर चलते हैं। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, रियल एस्टेट और मौसमी निर्माण इन्हें प्रभावित करते हैं। भारतीय बंदरगाहों पर आयातित HMS का भाव एक ऊपरी सीमा भी तय करता है।
स्टेनलेस स्टील: इसमें निकल और क्रोम की मात्रा कीमत तय करती है। SS 316, SS 304 से महँगा और SS 304, 200-सीरीज़ से महँगा होता है। ग्रेड मिलाने पर पूरा लॉट सबसे निचले ग्रेड के भाव पर आ जाता है।
ग्रेड और हालत से रेट कैसे बदलता है
स्क्रैप पर पैसा गँवाने का सबसे तेज़ तरीका है उसे "मिक्स" बेचना। हालत का असर ऐसे पड़ता है:
- साफ़ बनाम गंदा: तेल, पेंट, रबर, प्लास्टिक और मिट्टी फर्नेस में यील्ड घटाते हैं, इसलिए कटौती होती है।
- जुड़ी हुई चीज़ें: लोहे की मोटर बॉडी में तांबे की वाइंडिंग, MS पाइप पर पीतल के वाल्व – अलग न करने पर कम भाव मिलता है।
- आकार: बहुत हल्का माल (पतली शीट, टर्निंग) ज़्यादा नुकसान के साथ पिघलता है, इसलिए बंडल न हो तो कम रेट मिलता है।
- पहचान: बिना मार्किंग का स्टेनलेस या अलॉय स्टील सावधानी से कम आँका जाता है। मटेरियल सर्टिफ़िकेट हो तो ज़रूर दिखाएँ।
काम की सलाह: खरीदार को बुलाने से पहले एक दिन छँटाई में लगाएँ। तांबा, पीतल, एल्युमिनियम, स्टेनलेस और MS के अलग ढेर बनाने से मिक्स वर्कशॉप स्क्रैप की कुल कमाई आम तौर पर 8–15% बढ़ जाती है।
स्क्रैप कोटेशन को सही तरह कैसे पढ़ें
वाराणसी में कोटेशन मिलने पर देखें कि उसमें लिखित रूप में ये बातें हैं:
- हर ग्रेड का प्रति किलो रेट, एक मिला-जुला आँकड़ा नहीं।
- लोडिंग, मज़दूरी और ट्रांसपोर्ट का खर्च कौन देगा।
- तौल कहाँ होगी – बेहतर है सरकारी प्रमाणित धर्म कांटे पर, खाली और भरे ट्रक दोनों की पर्ची के साथ।
- कटौती: नमी, धूल या जुड़ी चीज़ों के लिए कितना प्रतिशत, और कैसे गिना जाएगा।
- वैधता: रेट कितने दिन मान्य है।
- भुगतान: एडवांस, उसी दिन RTGS/NEFT, या डिलीवरी के बाद।
- कागज़ात: GST बिल, ई-वे बिल और कांटा पर्ची।
अगर खरीदार रेट और शर्तें लिखकर देने से मना करे, तो इसे चेतावनी समझें।
घरेलू कबाड़ी रेट बनाम इंडस्ट्रियल स्क्रैप रेट
वाराणसी की कई रेट लिस्ट दो अलग बाज़ारों को मिला देती हैं। घरेलू कबाड़ी रेट थोड़ी मात्रा की रद्दी, प्लास्टिक और बर्तनों के लिए होते हैं, जिन्हें हाथ के तराज़ू से तौला जाता है। इंडस्ट्रियल रेट टन वाले लॉट पर लागू होते हैं – ग्रेड के हिसाब से छँटे, धर्म कांटे पर तौले और GST बिल के साथ। बड़े लॉट में प्रति किलो हैंडलिंग खर्च बहुत कम होता है, इसलिए छँटा हुआ माल हो तो इंडस्ट्रियल विक्रेता को उसी मेटल का बेहतर रेट मिलना चाहिए। Kabadi24 केवल इंडस्ट्रियल और व्यावसायिक विक्रेताओं के साथ काम करता है।
पूर्वांचल में मौसम के हिसाब से पैटर्न
- बरसात (जुलाई–सितंबर): निर्माण धीमा, फेरस स्क्रैप की माँग कम, और खुले में रखे माल पर नमी की कटौती ज़्यादा।
- त्योहारों के बाद और वित्त वर्ष का अंत (जनवरी–मार्च): कई कंपनियाँ खाते बंद करने से पहले स्टोर खाली करती हैं, इसलिए सप्लाई बढ़ती है।
- बजट और नीति घोषणाएँ: आयात शुल्क, GST या स्टील नीति में बदलाव कुछ ही दिनों में भाव हिला सकते हैं।
अच्छे भाव के इंतज़ार में महीनों स्क्रैप रखना अक्सर जगह, चोरी के जोखिम और जंग के कारण फ़ायदे से ज़्यादा महँगा पड़ता है।
Kabadi24 वाराणसी और पूर्वांचल के लिए रेट कैसे तय करता है
इंडस्ट्रियल एरिया फ़ेज़ 1, रामनगर, चंदौली स्थित हमारे मुख्य कार्यालय से टीम यह प्रक्रिया अपनाती है:
- आप व्हाट्सऐप (+91 97115 93877) पर फ़ोटो, मटेरियल लिस्ट और अनुमानित मात्रा भेजते हैं।
- उसी दिन हम अनुमानित रेट का दायरा बताते हैं।
- हमारा सर्वेयर 24–48 घंटे में वाराणसी, चंदौली, मिर्ज़ापुर, भदोही, जौनपुर, ग़ाज़ीपुर और आसपास कहीं भी आकर ग्रेड जाँचता है।
- आपको लोडिंग, ट्रांसपोर्ट और भुगतान शर्तों सहित लिखित, ग्रेड-वार कोटेशन मिलता है।
- माल प्रमाणित धर्म कांटे पर तौला जाता है और आपको GST बिल व कांटा पर्ची मिलती है।
पूरे भारत के विक्रेता और खरीदार Kabadi24 मार्केटप्लेस पर मुफ़्त लिस्टिंग डालकर वेरिफ़ाइड पार्टियों तक पहुँच सकते हैं।
वाराणसी में स्क्रैप बेचने से पहले चेकलिस्ट
- मेटल और ग्रेड के हिसाब से छँटाई करें।
- जहाँ संभव हो, नॉन-मेटल चीज़ें अलग करें।
- मात्रा का अनुमान लगाएँ (मोटा आँकड़ा भी ट्रक प्लान करने में मदद करता है)।
- बड़े लॉट के लिए कम से कम दो लिखित कोटेशन लें।
- धर्म कांटा और उसका खर्च कौन देगा, यह तय करें।
- GST, TDS और बिलिंग अपने अकाउंटेंट से पक्का करें।
- लोडिंग से पहले लॉट की फ़ोटो रखें।
निष्कर्ष
"आज का स्क्रैप रेट" कोई एक नंबर नहीं है। यह मेटल बाज़ार, स्थानीय माँग, ग्रेड, मात्रा और लॉट की तैयारी का नतीजा है। जो व्यवसाय अपना स्क्रैप छाँटते हैं, धर्म कांटे पर तौल पर ज़ोर देते हैं और लिखित ग्रेड-वार कोटेशन की तुलना करते हैं, वे फ़ोन पर बताए भाव पर बेचने वालों से लगातार ज़्यादा कमाते हैं। वाराणसी या पूर्वांचल में इंडस्ट्रियल स्क्रैप है तो फ़ोटो और मात्रा भेजें – हम साफ़, लिखित रेट देंगे।