फेरस स्क्रैप खरीदते या बेचते हैं तो "HMS" हर दिन सुनेंगे। मिलें HMS का रेट बताती हैं, इम्पोर्टर "HMS 80:20" के कंटेनर बुक करते हैं और खरीदार घरेलू माल को "HMS जैसा" कहते हैं। फिर भी बहुत से विक्रेता नहीं जानते कि HMS का असल मतलब क्या है। यह गाइड HMS ग्रेड, स्पेसिफिकेशन, मिश्रण और भाव समझाती है।
HMS का मतलब
HMS यानी हैवी मेल्टिंग स्क्रैप (हैवी मेल्टिंग स्टील)। यह रीसाइकल स्टील का बड़ा ग्रेड है जो इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस, इंडक्शन फर्नेस और अन्य स्टील निर्माण में पिघलाया जाता है। इसकी परिभाषा अंतरराष्ट्रीय स्पेसिफिकेशन में है, सबसे आम ISRI वाली।
HMS 1 (ISRI 200 / 201)
- गढ़ा लोहा और/या स्टील स्क्रैप।
- मोटाई आम तौर पर 1/4 इंच (लगभग 6.35 mm) और ऊपर।
- टुकड़े तय आकार में (अक्सर 60 × 24 इंच तक), चार्जिंग बॉक्स में जाने लायक।
- सख़्त परिभाषा में गैल्वनाइज़्ड या कोटेड माल नहीं।
- नॉन-फेरस, नॉन-मेटल और ज़्यादा जंग या मिट्टी से मुक्त।
उदाहरण: मोटी प्लेट, भारी स्ट्रक्चरल सेक्शन, भारी पाइप और बीम, साइज़ में कटे।
HMS 2 (ISRI 203 / 204)
- काला और गैल्वनाइज़्ड गढ़ा लोहा व स्टील स्क्रैप।
- मोटाई आम तौर पर 1/8 इंच (लगभग 3.2 mm) और ऊपर।
- समान आकार सीमा।
- नॉन-फेरस और नॉन-मेटल से मुक्त।
उदाहरण: हल्के स्ट्रक्चरल टुकड़े, पतले पाइप, मध्यम मोटाई की शीट।
80:20 मिश्रण
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में HMS अक्सर मिश्रण में बिकता है – सबसे आम HMS 1:HMS 2 = 80:20, यानी वज़न में 80% HMS 1 और 20% HMS 2। 70:30 और 50:50 भी चलते हैं। HMS 1 ज़्यादा = बेहतर यील्ड और ऊँचा भाव।
स्पेसिफिकेशन क्यों ज़रूरी
स्टील बनाने वालों को भरोसेमंद स्क्रैप चाहिए। मोटा, साफ़ HMS 1 ज़्यादा यील्ड, कम अशुद्धि और कम स्लैग देता है। पतला, जंग लगा या गंदा स्क्रैप यील्ड घटाता है, बिजली खपत बढ़ाता है और तांबा, टिन या जस्ता जैसे अनचाहे तत्व ला सकता है। इसलिए स्पेसिफिकेशन सख़्त हैं और खरीदार माल ध्यान से जाँचते हैं।
घरेलू बाज़ार में HMS
भारत में कई खरीदार HMS शब्द ढीले ढंग से इस्तेमाल करते हैं – विक्रेता का "HMS" बस भारी MS स्क्रैप हो सकता है। बेचते समय सही विवरण दें: मोटाई का दायरा, आइटम का प्रकार (प्लेट, बीम, पाइप), कोटिंग (गैल्वनाइज़्ड, पेंट), जंग का स्तर, जुड़ी चीज़ें, और क्या फर्नेस-साइज़ में कटा है।
HMS का भाव कैसे तय होता है
अंतरराष्ट्रीय भाव
HMS का भाव डॉलर प्रति टन में, आम तौर पर गंतव्य बंदरगाह तक CFR (लागत और भाड़ा) पर। तुर्की का HMS 80:20 आयात भाव दुनिया भर में देखा जाने वाला बेंचमार्क है।
भारत में घरेलू भाव
भारतीय मिलें तुलना करती हैं: घरेलू HMS/MS भाव, आयातित HMS की लैंडेड लागत (CFR + लागू शुल्क + पोर्ट और अंदरूनी भाड़ा), स्पंज आयरन और पिग आयरन भाव, और तैयार स्टील व बिलेट भाव। लैंडेड आधार पर आयात सस्ता हो तो मिलें आयात बढ़ाती हैं और घरेलू भाव नरम होते हैं।
HMS के मुकाबले अन्य फेरस ग्रेड
| ग्रेड | क्या है | आम इस्तेमाल |
|---|---|---|
| HMS 1 | भारी स्टील, 6.35 mm+, साइज़ में कटा | EAF/IF, ऊँची यील्ड |
| HMS 2 | हल्का और कोटेड स्टील, साइज़ में | पिघलाना, कम यील्ड |
| श्रेडेड | श्रेडर से निकले एक-जैसे टुकड़े | EAF चार्जिंग, एकसार |
| P&S (प्लेट और स्ट्रक्चरल) | साफ़ कटी प्लेट और स्ट्रक्चरल | प्रीमियम स्क्रैप |
| बंडल | दबाया हल्का स्टील | पिघलाना, ज़्यादा नुकसान |
| बुशलिंग | नए उत्पादन की साफ़ कटिंग | प्रीमियम, कम अवशेष |
| टर्निंग | मशीनिंग छीलन | कम भाव, ब्रिकेटिंग चाहिए |
भारत में HMS आयात
भारत में HMS आयात के लिए मेटल स्क्रैप आयात नियमों का पालन चाहिए – DGFT मान्यता प्राप्त एजेंसी का प्री-शिपमेंट इंस्पेक्शन सर्टिफ़िकेट (PSIC), रेडिएशन जाँच और पर्यावरण नियम। इम्पोर्टर के पास IEC होना चाहिए। मान्य एजेंसियों की सूची समय-समय पर बदलती है, इसलिए बुकिंग से पहले DGFT की ताज़ा सूची देखें।
पूर्वांचल मिल के लिए व्यावहारिक तुलना
वाराणसी के पास की एक इंडक्शन फर्नेस घरेलू भारी MS की तुलना आयातित HMS 80:20 से करती है। घरेलू MS सड़क से जल्दी, छोटे लॉट में और कम पूँजी में आता है, पर सप्लायर के हिसाब से गुणवत्ता बदलती है। आयातित HMS के लिए बड़े लॉट, LC या एडवांस, पोर्ट क्लियरेंस और लंबी अंदरूनी ढुलाई चाहिए, पर यील्ड ज़्यादा भरोसेमंद है। मिल स्क्रैप प्रति टन नहीं, तरल स्टील प्रति टन की लागत गिनती है – यील्ड और बिजली सहित। अक्सर दोनों का मिश्रण सबसे अच्छा रहता है। आयात आम तौर पर कोलकाता और हल्दिया जैसे पूर्वी बंदरगाहों से आता है।
खरीदारों के लिए जाँच टिप्स
- गेज से मोटाई का बँटवारा जाँचें।
- ज़्यादा जंग और मिट्टी देखें।
- नॉन-फेरस, बंद कंटेनर और ख़तरनाक आइटम देखें।
- आयात के लिए रेडिएशन क्लियरेंस पक्का करें।
- फ़ोटो और अनुबंध स्पेसिफिकेशन से मिलाएँ।
घरेलू विक्रेताओं के लिए HMS तैयारी चेकलिस्ट
- फर्नेस-साइज़ में काटें।
- भारी (6 mm+) माल को हल्के से अलग करें।
- गैल्वनाइज़्ड और पेंट वाला स्टील अलग रखें।
- नॉन-फेरस, रबर और प्लास्टिक हटाएँ।
- मिट्टी, कंक्रीट और पानी से बचाएँ।
- लॉट की फ़ोटो और वज़न दर्ज करें।
Kabadi24 और HMS
Kabadi24 वाराणसी और पूर्वांचल की यूनिटों से भारी और हल्का MS स्क्रैप खरीदता है, अपनी गैस-कटिंग टीम से फर्नेस-साइज़ में तैयार करता है और सही ग्रेडिंग करता है। रामनगर मुख्य कार्यालय की ट्रेड डेस्क से हम पूरे भारत की मिलों को आयातित HMS और अन्य फेरस ग्रेड दिलाने में भी मदद करते हैं – कागज़ात, पोर्ट रूटिंग और अंदरूनी डिलीवरी सहित। मिलें Kabadi24 मार्केटप्लेस पर अपनी ज़रूरत पोस्ट कर सकती हैं।
निष्कर्ष
HMS फेरस स्क्रैप व्यापार की रीढ़ है। HMS 1 और HMS 2 का फ़र्क, 80:20 जैसे मिश्रण और सही विवरण से खरीदार और विक्रेता दोनों निष्पक्ष भाव तय कर सकते हैं।