स्क्रैप की हर बातचीत आख़िर में दो शब्दों पर आती है: फेरस और नॉन-फेरस (अलौह)। यही तय करते हैं कि माल कौन खरीदेगा, कैसे प्रोसेस होगा और सबसे अहम, कितने का बिकेगा। लोहे के बीच छिपे तांबे और पीतल वाला मिक्स ट्रक, छँटे हुए उसी माल से बहुत कम कीमत पाता है।
फेरस स्क्रैप क्या है?
वह धातु जिसका मुख्य घटक लोहा है। यह आम तौर पर चुंबकीय है (कुछ स्टेनलेस अपवाद)। मुख्य खरीदार स्टील मिल, इंडक्शन फर्नेस और फाउंड्री।
आम फेरस स्क्रैप: माइल्ड स्टील (MS) – स्ट्रक्चरल, प्लेट, शीट, पाइप, सरिया; HMS 1 और 2; कास्ट आयरन (CI) – मशीन बेड, इंजन ब्लॉक, पंप केसिंग; टर्निंग और बोरिंग; रेल और पहिए; अलॉय स्टील; और स्टेनलेस स्टील – तकनीकी रूप से लोहे की मिश्रधातु, पर निकल-क्रोमियम के कारण अलग बिकता है।
नॉन-फेरस स्क्रैप क्या है?
वह धातु जिसका मुख्य घटक लोहा नहीं। आम तौर पर चुंबक नहीं चिपकता और जंगरोधी। खरीदार स्मेल्टर, रिफ़ाइनर, डाई-कास्टर, वायर-रॉड मिल और अलॉय निर्माता।
आम नॉन-फेरस स्क्रैप: तांबा (वायर, केबल, बस बार, वाइंडिंग, ट्यूब), पीतल (वाल्व, फ़िटिंग, टर्निंग), कांसा और गनमेटल (बुश, बेयरिंग, इम्पेलर), एल्युमिनियम (सेक्शन, शीट, कास्टिंग, केबल, रेडिएटर), सीसा (बैटरी, शीट), जस्ता (डाई-कास्टिंग) और निकल अलॉय व टाइटेनियम।
भाव में अंतर
| कैटेगरी | मटेरियल | अनुमानित ₹/किलो (इंडस्ट्रियल लॉट) |
|---|---|---|
| फेरस | MS / HMS | 28 – 34 |
| फेरस | कास्ट आयरन | 24 – 29 |
| स्टेनलेस | SS 304 | 100 – 115 |
| नॉन-फेरस | एल्युमिनियम | 140 – 190 |
| नॉन-फेरस | पीतल | 380 – 430 |
| नॉन-फेरस | तांबा | 580 – 660 |
यानी फेरस लोड में छिपा 100 किलो तांबा एक टन लोहे से ज़्यादा कीमती हो सकता है।
कास्ट आयरन बनाम माइल्ड स्टील
| माइल्ड स्टील | कास्ट आयरन | |
|---|---|---|
| कार्बन | कम (आम तौर पर 0.3% से कम) | ज़्यादा (लगभग 2–4%) |
| व्यवहार | मुड़ता है | भुरभुरा, दानेदार भूरी सतह से टूटता है |
| आम आइटम | प्लेट, सेक्शन, पाइप | मशीन बॉडी, कास्टिंग, पंप हाउसिंग |
| मुख्य खरीदार | स्टील मिल, इंडक्शन फर्नेस | फाउंड्री |
| भाव | अलग MS रेट | अलग CI रेट |
आसान छँटाई टेस्ट
- चुंबक: तेज़ चिपके = फेरस (MS, CI, 400-सीरीज़ स्टेनलेस); न चिपके = नॉन-फेरस या 304/316 स्टेनलेस। जेब का चुंबक सबसे काम का औज़ार है।
- रंग: तांबा लाल-भूरा (पुराना हो तो हरा); पीतल पीला-सुनहरा; कांसा/गनमेटल भूरा-सुनहरा; एल्युमिनियम सफ़ेद-चाँदी, हल्का; सीसा मटमैला, बहुत भारी; स्टेनलेस चमकदार, जंग नहीं; लोहा भूरा, लाल जंग।
- वज़न: एल्युमिनियम हल्का; सीसा बहुत भारी; तांबा-पीतल भारी।
- खरोंच: पेंट या ज़ंग के नीचे असली रंग दिखता है।
- तोड़ना (कास्ट आयरन): टूटा CI भूरी दानेदार सतह दिखाता है; स्टील मुड़ता है।
- पेशेवर औज़ार: XRF और स्पॉट टेस्ट किट।
एक उदाहरण: एक ट्रक, दो नतीजे
ग़ाज़ीपुर का एक मेंटेनेंस विभाग प्लांट ओवरहॉल के बाद 8 टन "स्क्रैप" ट्रक में भरता है: MS पाइप-एंगल, कुछ कास्ट आयरन पंप बॉडी, मोटर, पीतल के वाल्व, एल्युमिनियम कवर और तांबे की अर्थिंग पट्टी।
नतीजा A – मिक्स बेचा: खरीदार ढेर देखकर ज़्यादातर लोहा मानता है और एक मिक्स फेरस रेट "गंदगी" कटौती के साथ देता है। नॉन-फेरस मेटल असल में लोहे के भाव चले जाते हैं।
नतीजा B – पहले छाँटा: टीम चुंबक और दस्तानों के साथ एक दिन लगाती है – लगभग 6.2 टन MS, 900 किलो कास्ट आयरन, 450 किलो मोटर, 180 किलो पीतल वाल्व, 220 किलो एल्युमिनियम कवर और 50 किलो तांबा पट्टी। हर ग्रेड का अलग रेट।
नॉन-फेरस हिस्सा वज़न का सिर्फ़ लगभग 6% है, फिर भी नतीजा B में कुल कीमत का बड़ा हिस्सा देता है। एक दिन की छँटाई कई गुना वसूल होती है।
छँटाई से फ़ायदा
हर ग्रेड का अपना रेट, कम कटौती, सही खरीदार (मिल, फाउंड्री, स्मेल्टर), जल्दी बिक्री और ग्रेड-वार साफ़ हिसाब।
फैक्ट्री में छँटाई व्यवस्था
MS, CI, स्टेनलेस, तांबा, पीतल, एल्युमिनियम और मिक्स के लिए लेबल वाले डिब्बे; हर स्क्रैप पॉइंट पर चुंबक; मेंटेनेंस टीम को मोटर, केबल और फ़िटिंग अलग करना सिखाएँ; नॉन-फेरस ताले में; और साप्ताहिक जाँच।
मिली-जुली चीज़ें
मोटर (लोहे की बॉडी + तांबा/एल्युमिनियम वाइंडिंग), रेडिएटर (एल्युमिनियम फ़िन + तांबा ट्यूब), वाल्व (पीतल बॉडी + लोहे का हैंडल), केबल (तांबा/एल्युमिनियम + स्टील आर्मर)। इन्हें मिक्स रेट पर बेचें या खोलकर ज़्यादा कुल कीमत लें।
Kabadi24 मिक्स लॉट कैसे संभालता है
Kabadi24 साइट पर मिक्स इंडस्ट्रियल स्क्रैप को फेरस, स्टेनलेस और नॉन-फेरस में छाँटता है और हर ग्रेड का लिखित रेट देता है। मार्केटप्लेस के ज़रिए छँटे लॉट पूरे भारत के सही खरीदारों तक जाते हैं: MS मिलों को, कास्ट आयरन फाउंड्री को, नॉन-फेरस स्मेल्टर को।
निष्कर्ष
फेरस स्क्रैप लोहे वाला, चुंबकीय और मात्रा में बिकने वाला है; नॉन-फेरस बिना लोहे का, आम तौर पर बिना चुंबक का और प्रति किलो कहीं ज़्यादा कीमती। एक चुंबक, थोड़ी जानकारी और लेबल वाले डिब्बों से कोई भी फैक्ट्री काफ़ी ज़्यादा कमा सकती है।