# लोहे के स्क्रैप का रेट प्रति किलो: MS, HMS और कास्ट आयरन स्क्रैप भाव गाइड

> भारत में MS, HMS 1 और 2, कास्ट आयरन, टर्निंग और स्ट्रक्चरल स्टील स्क्रैप के रेट की व्यावहारिक गाइड – भाव किन बातों से बदलता है और वाराणसी की फैक्ट्रियाँ फेरस स्क्रैप सबसे अच्छे भाव पर कैसे बेचें।

Source: https://kabadi24.com/hi/blog/iron-ms-scrap-rate-guide.html  
Publisher: Kabadi24 (B2B scrap marketplace, HQ Ramnagar, Varanasi, India) · Updated: 2026-10-21

## झटपट जवाब और मुख्य बातें

- लोहे के स्क्रैप का भाव देश के स्टील, बिलेट और स्पंज आयरन के दाम तथा मिल तक के भाड़े पर चलता है।
- भारी, साफ़ MS स्क्रैप, हल्की शीट, टर्निंग या जंग लगे और गंदे माल से ज़्यादा कीमत पाता है।
- कास्ट आयरन MS से अलग भाव पर बिकता है क्योंकि वह अलग तरह पिघलता है और फाउंड्री में जाता है।
- हल्के स्क्रैप का बंडल बनाने और उसे सूखा रखने से कटौती घटती है।
- ट्रक लॉट का हिसाब धर्म कांटे के नेट वज़न पर करें, खाली और भरे ट्रक की पर्ची के साथ।

किसी भी फैक्ट्री की सफ़ाई, प्लांट डिस्मेंटलिंग या मेंटेनेंस शटडाउन में सबसे ज़्यादा टनेज लोहे और स्टील स्क्रैप का होता है। प्रति किलो रेट तांबे या पीतल से कम है, लेकिन मात्रा के कारण अक्सर पूरे सौदे की कीमत फेरस स्क्रैप ही तय करता है। 50 टन पर सिर्फ़ ₹2 प्रति किलो का फ़र्क ₹1,00,000 होता है। यह गाइड बताती है कि लोहे के स्क्रैप की ग्रेडिंग और भाव कैसे होते हैं, और वाराणसी व पूर्वांचल की यूनिटें इसे फ़ायदे में कैसे बेचें।

## लोहे और स्टील स्क्रैप के प्रकार

### MS (माइल्ड स्टील) स्क्रैप
एंगल, चैनल, बीम, प्लेट, पाइप, सरिया और फैब्रिकेशन की कटिंग। यह सबसे आम इंडस्ट्रियल फेरस स्क्रैप है। मोटा और साफ़ MS बेहतर भाव पाता है।

### HMS 1 और HMS 2 (हैवी मेल्टिंग स्क्रैप)
व्यापार में इस्तेमाल होने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्रेड। HMS 1 भारी, साफ़ स्टील है, कम से कम 6 mm मोटा; HMS 2 में पतला और हल्का माल, काला और गैल्वनाइज़्ड स्टील शामिल है। आयातित HMS अक्सर 80:20 मिश्रण में बिकता है।

### कास्ट आयरन (CI) स्क्रैप
मशीन बेड, इंजन ब्लॉक, पंप केसिंग, मैनहोल कवर और पुली। इसमें कार्बन ज़्यादा होता है, यह भुरभुरा होता है और ज़्यादातर फाउंड्री में जाता है। इसका भाव MS से अलग होता है।

### टर्निंग और बोरिंग
मशीनिंग से निकले बारीक छीलन। ये जल्दी ऑक्सीकृत होते हैं और इनमें कटिंग ऑयल होता है। ब्रिकेट न बनें तो कम भाव मिलता है।

### हल्का और शीट स्क्रैप
पतली शीट, टीन, हल्की कटिंग और छत की चादरें। ये ज़्यादा नुकसान से पिघलती हैं, इसलिए कम भाव या बंडल।

### रेल और स्पेशल स्टील
रेल, पहिए और अलॉय स्टील का अलग बाज़ार है; सही पहचान हो तो प्रीमियम मिलता है।

## लोहे के स्क्रैप के अनुमानित रेट (अक्टूबर 2026)

| ग्रेड | अनुमानित ₹/किलो |
|---|---|
| भारी MS (6 mm और ऊपर, साफ़) | 31 – 34 |
| मिक्स MS स्ट्रक्चरल | 28 – 32 |
| हल्की शीट / पतली कटिंग | 24 – 28 |
| कास्ट आयरन | 24 – 29 |
| टर्निंग (खुली) | 18 – 23 |
| जंग लगा और गंदा मिक्स | लॉट देखकर |

ये वाराणसी क्षेत्र के इंडस्ट्रियल लॉट के अनुमानित दायरे हैं। लाइव रेट रोज़ के स्टील बाज़ार पर निर्भर हैं।

## लोहे के स्क्रैप का भाव किन बातों से तय होता है

**देश का स्टील भाव।** तैयार स्टील और बिलेट महँगे होने पर मिलें स्क्रैप का ज़्यादा भाव देती हैं।

**स्पंज आयरन और पिग आयरन।** इंडक्शन फर्नेस वाले स्क्रैप, स्पंज आयरन और पिग आयरन में से चुनते हैं। स्पंज आयरन सस्ता हो तो स्क्रैप की माँग घटती है।

**आयात समानता।** भारतीय मिलें HMS और श्रेडेड स्क्रैप आयात भी करती हैं। बंदरगाह पर आयातित स्क्रैप की लागत घरेलू भाव के लिए संदर्भ बनती है।

**निर्माण का मौसम।** बरसात में लंबे स्टील की माँग कम होती है, जिसका असर स्क्रैप भाव पर आता है।

**भाड़ा।** फेरस स्क्रैप भारी और प्रति किलो सस्ता है, इसलिए साइट से मिल तक का ट्रक भाड़ा भाव का बड़ा हिस्सा लेता है। हाईवे और रामनगर जैसे क्लस्टर के पास की साइटों को बेहतर नेट रेट मिलता है।

## फेरस स्क्रैप की कीमत कैसे बढ़ाएँ

1. **कास्ट आयरन को MS से अलग करें।** मिलाने पर खरीदार सब कुछ कम भाव पर लेगा या छँटाई का समय लेगा।
2. **नॉन-फेरस चीज़ें निकालें।** तांबे की वायरिंग, पीतल के वाल्व, एल्युमिनियम पार्ट्स और रबर हटाएँ।
3. **बड़े आइटम काटें।** जो ढाँचा लोड या फर्नेस में न जा सके, उसे काटना पड़ता है; खरीदार काटे तो खर्च रेट से घटेगा।
4. **हल्के माल का बंडल बनाएँ।** दबे बंडल बेहतर लोड होते और पिघलते हैं।
5. **टर्निंग को तेल-मुक्त और सूखा रखें।**
6. **मिट्टी और कंक्रीट से बचें।** कीचड़ से घसीटा या कंक्रीट लगा माल भारी कटौती पाता है।

## फेरस स्क्रैप के लिए धर्म कांटा तौल

ट्रक लॉट के लिए प्रमाणित धर्म कांटे पर ज़ोर दें:

- खाली ट्रक तौला जाता है (टेयर वज़न)।
- भरा ट्रक तौला जाता है (ग्रॉस वज़न)।
- नेट वज़न = ग्रॉस माइनस टेयर।
- दोनों की छपी पर्ची, गाड़ी नंबर, तारीख और समय के साथ मिलती है।

रामनगर, चंदौली में हमारा मुख्य कार्यालय स्वस्तिक धर्म कांटे के ठीक सामने है, जिससे स्थानीय यूनिटों की तौल तेज़ और पारदर्शी होती है।

## कटौती पर नज़र रखें

धूल, नमी, जंग या जुड़ी चीज़ों के लिए प्रतिशत कटौती ठीक हो सकती है अगर साफ़ समझाई जाए, लेकिन यह पहले से लिखित में तय होनी चाहिए। तौल के बाद बिना वजह "कांटा कटौती" विवाद की आम वजह है।

## एक उदाहरण: मात्रा में ग्रेडिंग क्यों ज़रूरी

चाँदपुर इंडस्ट्रियल एस्टेट की एक फैब्रिकेशन यूनिट के पास 40 टन फेरस स्क्रैप है: 25 टन भारी MS प्लेट व स्ट्रक्चरल, 8 टन कास्ट आयरन मशीन पार्ट्स और 7 टन हल्की शीट व टर्निंग। एक मिक्स ढेर में बेचने पर खरीदार हल्के स्क्रैप जैसा भाव लगाएगा। तीन अलग ढेरों में भारी MS को ऊँचा MS रेट, कास्ट आयरन को फाउंड्री का CI रेट और सिर्फ़ हल्के माल को कम रेट मिलता है। भारी हिस्से पर ₹2–3 प्रति किलो का फ़र्क भी इस लॉट पर ₹50,000–75,000 बनता है।

## फेरस स्क्रैप यार्ड के लिए भंडारण और सुरक्षा

- MS, CI, हल्के स्क्रैप और टर्निंग के अलग बे बनाएँ।
- ढेर कम ऊँचे और स्थिर रखें; लंबे सेक्शन सुरक्षित करें।
- टर्निंग ढककर रखें।
- यार्ड बंद रखें और बाहर जाने वाले हर लोड का रिकॉर्ड रखें।
- नियमित बेचें; जंग लगा माल कम भाव पाता है।

## दस्तावेज़ और नियम

व्यवसायों के बीच फेरस स्क्रैप बिक्री पर सही GST बिल ज़रूरी है, और अक्टूबर 2024 से मेटल स्क्रैप पर GST के रिवर्स चार्ज और TDS प्रावधान लागू हैं। इनकम टैक्स के तहत TCS भी लागू हो सकता है। बड़ी या अंतर-राज्यीय ढुलाई के लिए ई-वे बिल ज़रूरी है। बड़े सौदों से पहले अपने CA से ताज़ा नियम पक्के करें।

## प्लांट डिस्मेंटलिंग से निकला लोहा

शेड, ढाँचा या प्लांट तोड़ने पर निकला फेरस स्क्रैप आम तौर पर डिस्मेंटलिंग का पूरा या ज़्यादातर खर्च निकाल देता है। अच्छा खरीदार डिस्मेंटलिंग और स्क्रैप का भाव साथ में देगा, ताकि आप नेट नतीजे की तुलना कर सकें। सुरक्षा की ज़िम्मेदारी, समय-सीमा, मलबा हटाना और साइट की सफ़ाई अनुबंध में लिखें।

## Kabadi24 पूर्वांचल में फेरस स्क्रैप कैसे लेता है

Kabadi24 वाराणसी, चंदौली, मिर्ज़ापुर, भदोही, जौनपुर, ग़ाज़ीपुर, सोनभद्र और अन्य पूर्वांचल ज़िलों की फैक्ट्रियों, ठेकेदारों और प्लांटों से MS, HMS, कास्ट आयरन, टर्निंग, रेल और स्ट्रक्चरल स्टील खरीदता है। हम साइट पर ग्रेड जाँचते हैं, MS, CI और बाकी ग्रेड का अलग रेट देते हैं, लोडिंग टीम, गैस कटिंग और ट्रक भेजते हैं, प्रमाणित धर्म कांटे पर तौलते हैं और GST बिल देते हैं। पूरे भारत के विक्रेता और मिलें मार्केटप्लेस पर लिस्टिंग डाल सकते हैं।

## निष्कर्ष

लोहे का स्क्रैप मात्रा का कारोबार है, जहाँ ग्रेडिंग, सफ़ाई और तौल के छोटे फ़र्क बड़ी रकम बन जाते हैं। MS को कास्ट आयरन से अलग करें, जुड़ी चीज़ें हटाएँ, माल सूखा रखें और धर्म कांटे की पारदर्शी तौल पर ज़ोर दें।

## अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

### आज लोहे के स्क्रैप का रेट प्रति किलो क्या है?

वाराणसी क्षेत्र के इंडस्ट्रियल लॉट में मिक्स MS स्क्रैप लगभग ₹28–32 प्रति किलो और भारी साफ़ MS लगभग ₹31–34 प्रति किलो (अनुमानित) है। भाव स्टील बाज़ार के साथ बदलते हैं, इसलिए लिखित ताज़ा कोटेशन लें।

### HMS 1 और HMS 2 में क्या फ़र्क है?

HMS 1 भारी स्टील स्क्रैप है, आम तौर पर 6.35 mm या उससे मोटा और बिना कोटिंग। HMS 2 में पतला, हल्का, काला और गैल्वनाइज़्ड स्टील शामिल है। HMS 1 का भाव ज़्यादा होता है।

### कास्ट आयरन स्क्रैप का भाव MS से अलग क्यों होता है?

कास्ट आयरन में कार्बन ज़्यादा होता है और यह ज़्यादातर फाउंड्री में जाता है, जबकि MS स्टील मिलों में। माँग और पिघलने का व्यवहार अलग होने से भाव अलग होते हैं।

### लोहा बेचते समय वज़न की धोखाधड़ी से कैसे बचें?

सरकारी प्रमाणित धर्म कांटा इस्तेमाल करें, गाड़ी नंबर सहित खाली और भरे ट्रक की पर्ची जाँचें और लोडिंग से पहले कोई भी कटौती लिखित में तय करें।

### क्या आप पूर्वांचल में प्लांट डिस्मेंटलिंग का लोहा खरीदते हैं?

हाँ। Kabadi24 वाराणसी और पूर्वांचल में डिस्मेंटलिंग करता है और निकला फेरस स्क्रैप खरीदता है, डिस्मेंटलिंग और स्क्रैप का भाव साथ में देकर।

